बिरजू महाराज रगों में बहता था प्रयाग डॉ. धनंजय चोपड़ा यमुना तट पर स्थित सरस्वती घाट की वह अप्रतिम शाम। त्रिवेणी महोत्सव का भव्य आयोजन । बिरजू महाराज मंच पर आने वाले थे। लोगों में अद्भुत उत्साह था। कथक सम्राट की झलक पाने और उनके नृत्य के भावों से सराबोर हो जाने की आतुरता बढ़ती ही जा रही थी। और...अचानक लोगों के कान में आवाज गूंजी...आए रहे हैं भाई, थोड़ा सबर करो। यह तो अपने बिरजू महाराज की आवाज है, यह समझते लोगों को देर न लगी और फिर तालियों से पूरा वातावरण गूंज उठा। और फिर जब बिरजू महाराज मंच पर आए तो लोग अपलक लय, थाप और भंगिमाओं को अनूठे समन्वय को देखते ही रह गए। उस दिन उन्होंने तब की उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों के बीच हुई धक्का-मुक्की और एक-दूसरे पर माईक फेंकने की घटना को मंच पर नृत्य व संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करके सभी को आश्चर्य में डाल दिया। बिरजू महाराज की प्रयोगधर्मिता ही उन्हें सबसे अलग करती थी। वे धड़ल्ले से कह देते- ‘ अरे भाई प्रयाग की रवायतें मेरे खून में है। कुछ नया करने की धुन और लोगों को अपनी ओर खींच लेने की ताकत इसी धरती से मिलता है। देखो न, कुंभ में शाम...